अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
भागलपुर के नवगछिया क्षेत्र स्थित कदवा दियारा विलुप्तप्राय ‘गरुड़’ पक्षी के प्रजनन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन यहां तेजी से घटती पेड़ों की संख्या इस प्रजाति के अस्तित्व के लिए खतरा बनती जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े और पुराने पेड़ों की कमी के कारण गरुड़ जैसे पक्षियों को सुरक्षित घोंसले बनाने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि इनकी संख्या लगातार घटने का खतरा बढ़ रहा है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए क्षेत्र में देशी प्रजाति के पेड़ों का बड़े पैमाने पर पुनरोपण करना जरूरी है। साथ ही पुराने पेड़ों की कटाई रोकने और लोगों में जागरूकता फैलाने की भी आवश्यकता है।
स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी को इस संरक्षण अभियान का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे-छोटे प्रयास भी इस दुर्लभ पक्षी को बचाने में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह अनमोल प्राकृतिक धरोहर हमेशा के लिए खत्म होने के कगार पर पहुंच सकती है।