लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।
इसी बीच चर्चा तेज हो गई है कि क्या सरकारी तेल कंपनियां 2022 की तरह रोजाना 80-90 पैसे प्रति लीटर कीमत बढ़ाने वाला फॉर्मूला फिर अपना सकती हैं।
दरअसल, मार्च 2022 में लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के बाद IOCL, BPCL और HPCL ने लगातार 13 बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए थे। उस दौरान कई दिनों तक लगभग 80 पैसे से 90 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई थी, जिससे आम लोगों पर बड़ा असर पड़ा था।
अब एक बार फिर हालात कुछ वैसे ही बनते दिख रहे हैं। Brent crude की कीमतों में तेज उछाल आया है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो तेल कंपनियों को खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। हालांकि सरकार टैक्स कटौती या अन्य राहत उपायों पर भी विचार कर सकती है ताकि आम उपभोक्ताओं पर दबाव कम हो।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इससे ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है और खाद्य पदार्थों समेत कई जरूरी चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं। कई यूजर्स 2022 की लगातार बढ़ती कीमतों को याद करते हुए मौजूदा हालात की तुलना कर रहे हैं।
फिलहाल तेल कंपनियों की ओर से किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बाजार और उपभोक्ताओं की नजरें अब आने वाले दिनों के फैसलों पर टिकी हैं।