लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
न्यूयॉर्क: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) भी कमजोर स्तर पर कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच कतर के दोहा में जारी परमाणु और प्रतिबंधों से जुड़ी वार्ताओं में सकारात्मक संकेत मिलने से बाजार में सप्लाई बढ़ने की उम्मीद बनी है।
यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है और ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिलती है, तो वैश्विक बाजार में अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है। इसी संभावना के चलते निवेशकों ने तेल की खरीद कम कर दी है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट पहले से लगाए गए कई बाजार अनुमानों के अनुरूप है।
तेल की कीमतों में नरमी का असर भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। इससे आयात बिल कम हो सकता है, महंगाई पर दबाव घट सकता है और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी भविष्य में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम दिशा अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजों और वैश्विक मांग पर निर्भर करेगी।