गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
Nitish Kumar ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देकर अपने राजनीतिक करियर में एक नया अध्याय जोड़ दिया। वे पहली बार 2006 में विधान परिषद के सदस्य बने थे और इसके बाद 2012, 2018 और 2024 में लगातार चार बार इस सदन के सदस्य रहे।
साल 2005 में बिहार की सत्ता संभालने के बाद उन्होंने हमेशा विधान परिषद के रास्ते ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। हालांकि 1985 में वे हरनौत से विधायक चुने गए थे और बाद में लोकसभा सांसद तथा केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे।
अब राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही नीतीश कुमार एक अनोखी उपलब्धि हासिल करने जा रहे हैं। वे विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद और राज्यसभा—चारों सदनों के सदस्य बनने वाले चुनिंदा नेताओं में शामिल होंगे।
विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद संवैधानिक रूप से उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा, हालांकि नियमों के अनुसार वे छह महीने तक बिना किसी सदन की सदस्यता के भी मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। इस दौरान उन्हें दोबारा किसी सदन का सदस्य बनना होगा।
करीब चार दशकों लंबे राजनीतिक सफर में यह कदम नीतीश कुमार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही उनके सार्वजनिक जीवन का नया चरण शुरू होगा।