लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
जयपुर में गरीबों के लिए बनाई गई एक महत्वाकांक्षी आवासीय योजना अब बदहाली की तस्वीर बन चुकी है। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इन फ्लैट्स का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को घर उपलब्ध कराना था, लेकिन आज यह परियोजना खंडहर में तब्दील हो चुकी है।
राजीव नगर क्षेत्र में बनी इस योजना के हजारों फ्लैट लंबे समय से खाली पड़े हैं। समय पर आवंटन न होने, रखरखाव की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते ये इमारतें धीरे-धीरे जर्जर हो गईं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अब इन खाली पड़े फ्लैट्स का इस्तेमाल असामाजिक तत्वों द्वारा किया जा रहा है। यहां नशेड़ियों और अपराधियों की आवाजाही बढ़ने से इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
यह स्थिति शहरी आवास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर इन परिसरों का उपयोग और रखरखाव किया जाता, तो करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति इस तरह बर्बाद नहीं होती।
प्रशासन की ओर से अब इन फ्लैट्स के पुनर्विकास और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों की अनदेखी ने इस परियोजना को पूरी तरह असफल बना दिया है।