गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
दिल्ली के द्वारका स्थित मल्टी-स्पोर्ट्स एरिना परियोजना को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से बड़ा झटका लगा है। ट्रिब्यूनल ने परियोजना से जुड़े ‘डीम्ड एनवायरनमेंट क्लियरेंस’ यानी स्वतः पर्यावरण मंजूरी के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
एनजीटी ने स्पष्ट कहा कि केवल समय बीत जाने से किसी परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी स्वतः प्राप्त नहीं हो जाती। पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े मामलों में विधिक प्रक्रिया और स्पष्ट स्वीकृति आवश्यक है।
ट्रिब्यूनल ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी को “औपचारिकता” मानना गंभीर भूल है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि बिना वैध स्वीकृति के बड़े निर्माण कार्य पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन माने जा सकते हैं।
द्वारका मल्टी-स्पोर्ट्स एरिना परियोजना को लेकर याचिका में आरोप लगाया गया था कि निर्माण कार्य बिना आवश्यक पर्यावरण मंजूरी के आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पर सुनवाई करते हुए NGT ने संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है।
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि विकास परियोजनाओं को पर्यावरणीय संतुलन और कानूनी मानकों के भीतर ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। नियमों की अनदेखी कर किसी भी परियोजना को वैध नहीं ठहराया जा सकता।
इस फैसले के बाद परियोजना की प्रगति पर असर पड़ सकता है और संबंधित एजेंसियों को अब पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया का पालन करना होगा।