आम आदमी पार्टी के तरफ से प्रियंका शुक्ला एवं इमरान खान ने रायपुर के जाकर पीड़ित उन मुस्लिम परिवारों, उनके बच्चों और महिलाओं से मुलाकात किया, जिनके घर का एक एक दाना बजरंग के लोगो ने जलाकर राख कर दिया, घर में आग लगाकर 13 परिवारों को जिंदा जलाने का साजिश किया गया, वो तो शुक्र है राजिम के थानेदार अमृत साहू जी का, जिन्होंने आखिरी समय में जाकर बच्चियों, महिलाओं और बाकी लोगों को बचाकर गांव से निकाला, लेकिन वहीं जिला के कलेक्टर , शासन प्रशासन ने इन परिवारों को इस तरह छोड़ दिया मानो कि कलेक्टर भगवान दास यूके की कोई निजी दुश्मनी या निजी एजेंडा हो, जिन्होंने इन परिवारों को साफ तौर पर यह कहकर मदद से इंकार कर दिया कि यह कोई दंगा नहीं है, और हमारे पास उनको मदद करने का कोई प्रावधान नहीं है।

आपको विस्तृत जानकारी दे दूं कि छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिला के राजिम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दुतकईया में 1 फरवरी को बजरंग दल के नेताओं ने उसी गांव में 100 वर्षों से रह रहे सभी मुस्लिम परिवारों के 13 घरों में आग लगा दी, साथ ही गांव वालो को उकसाकर अपने साथ ले जाकर घरों में घुसकर महिलाओं को बलात्कार की धमकी दी,छेड़खानी की और मुस्लिम महिलाओं के पतियों को उनके पत्नी और उनके बेटियों के लिए टिप्पणी करते हुए कहा कि तेरी बेटी बड़ी सुंदर है, बाहर निकाल उसको, मुस्लिम परिवारों के बेटियों के कपड़े फाड़ दिए गए, दुपट्टे खींचे गए, घर पुरुषों को चाकू , डंडा,रॉड, पेट्रोल बम से हमला किया गया।
इस पूरे मामले में जब आम आदमी पार्टी की तरफ से प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मानवाधिकार अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला, इमरान खान अपने साथियों के साथ जब इन परिवारों से मिलने के लिए रायपुर पहुंचे,तब जाकर पूरी घटना को विस्तृत रूप से पीड़ित मुस्लिम परिवार के लोगो ने प्रियंका शुक्ला एवं इमारन खान व अन्य के समक्ष उक्त सभी बातों को बताया।
आम आदमी पार्टी की नेता प्रियंका शुक्ला द्वारा जब उक्त घटना के संबंध में गरियाबंद के कलेक्टर भगवान दास उईके को फोन लगाकर घटना के संबंध में और परिवार को अब तक शासन से कोई भी मदद क्यों नहीं मिली, इसके सम्बन्ध में पूछा गया तब कलेक्टर भगवास दास का जवाब एकदम तानाशाह और असंवेदनशील ढंग से यह सुनने को मिला कि हमारे तरफ से तहसीलदार और SDM गए थे, मदद दी गई है, लेकिन हकीकत यह है कि 1 फरवरी से लेकर आज दिनांक तक सरकार के तरफ से इन बेघर परिवारों को किसी भी प्रकार की कोई मदद सरकार ने इन परिवारों को नहीं दी है, यहां तक कि खाने पीने से लेकर, कपड़े और रहने तक का इंतजाम सामाजिक कार्यकर्ता नोमान खान जी और अल्तमश जी के द्वारा किया गया है।

पीड़ितों ने बताया कि घटना दिनांक को मुस्लिम पुरुषों को पेट में चाकू और रॉड से इतना प्रहार किया गया था कि अगर थोड़ा भी देर होती तो जान जा चुकी होती, बावजूद उसके राजिम से लेकर रायपुर अस्पताल तक लाने का काम भी निजी स्तर पर सामाजिक कार्यकर्ता नोमान खान और अल्तमश जी के द्वारा ही करवाया गया है।
आम आदमी पार्टी के समक्ष महिलाओं के बताया कि आज तक उस तरह की घटना कभी गांव में नहीं हुई किंतु वर्ष 2023 - 24 में एक शिवलिंग तोड़ने की घटना हुई थी, जिसमें अज्ञात में FIR दर्ज हुई थी, किंतु बाद में मुस्लिम समुदाय के दो से 3 लड़कों का नाम FIR में जोड़ा गया और उनको जेल दाखिल कर दिया गया था, मुस्लिम समुदाय के तरफ सभी 13 परिवारों ने मिलकर तीनों लड़कों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया था और यह भी तय किया गया कि उक्त लड़कों को न ही कोई मदद समाज करेगा और न परिवार करेगा, बावजूद इसके 2 वर्षों में कभी मुस्लिम कब्रिस्तान को आग लगा देना, कभी घर के पास बिना किसी त्योहार के मुस्लिम परिवारों के घरों के आगे बम फोड़ना, कभी घरों के पास स्पीकर लगाकर आरती को बजाना आदि किया जाता रहा है बावजूद इसके मुस्लिम परिवार के तरफ से कभी भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
हाल में दिनांक 1 फरवरी की सुबह गांव के ही कुछ बजरंग दल के लोगों ने मुस्लिम परिवार के लोगो को 11 बजे के आस पास गांव से बाहर आने जाने से रोकना शुरू कर दिया, और सबको बोला गया कि तुम लोगों के लड़कों ने हमारे लोगो से मारपीट की है, यह बात सुनी सुनाई पता चली थी।

उसी समय से मुस्लिम परिवार के लोगो ने पुलिस में और समाज में लोगो को कॉल करके यह बाते बताई और गांव में आकर मदद करने को बोला किंतु पुलिस ने उस समय तक मामले को बहुत गंभीरता से नहीं लिया और लगभग 3 घंटे बाद पुलिस की पहली पेट्रोलिंग गाड़ी जिसमें मात्र दो से तीन लोग थे, वो दोपहर लगभग 2 बजे पहुंचे और चक्कर काटकर वापस चले गए।
इसी बीच बजरंग दल के लोग जो कि भारतीय जनता पार्टी से भी जुड़े लोग है उन लोगों ( जिसके नाम पीड़ितों को पता है) ने लाठी डंडा, बोतलों में पेट्रोल भरकर, तलवार आदि की तैयारी के साथ घरों में घुसकर मारपीट करना शुरू कर दिया, और इसी मारपीट में चाकू,लाठी, पेट्रोल बम से वार करके मारपीट किया, और जिंदा जलाने के लिए घरों में आग लगा दी।
महिलाओं और नाबालिग बच्चियों ने बताया कि बजरंग दल के लोग आए थे, उन लोगों ने ही गांव वालो को उकसाया, भड़काया और पास के गांव परसदा के भी कुछ लोगों बाहर से बुलवाया था, महिलाओं को यह टिप्पणी करी गई कि उसका आदमी तो अब कुछ कर नहीं सकता, निकालो इसको और इसका बलात्कार करो, लड़कियों ने बताया कि उनके साथ भी बलात्कार की कोशिश की गई, उनके हाथ पकड़कर खींचा गया और जबरदस्ती करने की कोशिश हुई और कपड़े फाड़ दिए गए, बचाने के लिए घर के आदमी सामने आए तो उनको बुरी तरह मारा गया, जिसके कारण लगभग 24 दिनों तक रायपुर में एडमिट रहे और कल दिनांक 24 फरवरी 2026 को डिस्चार्ज होकर लौटे है।
यह सब घटना को सुनना और महसूस करना हमारे लिए काफी भयावह है, और इससे भी अधिक भयावह , सरकार का इन पीड़ित परिवार के साथ का रवैया है, जो कि इन परिवारों के लिए एक इंच भी कोई कदम आगे नहीं बधाई है।
पीड़ितजन ने बताया कि इस पूरी घटना में मुस्लिम परिवारों के 13 के 13 घरों का सब कुछ जलकर बर्बाद हो गया, घटना में पुलिस के 7 जवान जिसमें थानेदार भी शामिल है, उनको भी बुरी तरह चोट आई थी, एक आरक्षक आज तक रायपुर के राम कृष्ण अस्पताल में जिंदगी मौत से लड़ रहा है।आज तक पीड़ितों में से सबके बयान ढंग से लिखे नहीं जा सके है क्योंकि माहौल काफी डरा हुआ था।

इस घटना पर मैं राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा , महिला आयोग, महिला एवं बाल विकास मंत्री, बीजेपी में शामिल मुस्लिम पदाधिकारियों को मै लानत भेजती हूं, और यही कहना चाहती हूँ कि धिक्कार है तुम लोगों को और इस सरकार को, जो संविधान का खुलेआम कत्ल करवा रहा है।यह घटना मुस्लिम परिवार पर हमला नहीं, यह हमला संविधान की मूल भावना पर हमला है, और छत्तीसगढ़ प्रदेश के शांति पर हमला है।
आम आदमी पार्टी की तरफ से हम यह मांग करते है कि...... मामले में अविलंब पीड़ितों को उनके रहने, खाने की ठीक ठाक व्यवस्था करते हुए, प्रत्येक परिवार को मुआवजा, उनके जले हुए घरों की मरम्मत करवाकर दे सरकार यह कि मामले में हाई कोर्ट के किसी रिटायर्ड जस्टिस के नेतृत्व में न्यायिक जांच का गठन कर जांच हो।
सभी के वक्तव्यों को लिखित में ढंग से पुनः दर्ज किया जाए।मुआवजा के अलावा घटना में घायल हुए लोग जिसमे पुलिस के जवान भी शामिल है, उनका पूरा इलाज का खर्च सरकार अलग से वहन करे।इस घटना में शामिल सबकी गिरफ्तारी की जानकारी सार्वजनिक कर, प्रत्येक दिन मामले की ब्रीफिंग जनता के बीच बताया जाये और घटना में शामिल षड्यंत्रकारी प्रत्येक जन को अविलंब गिरफ्तार किया जाए।
पीड़ितों परिवारों को सुरक्षा प्रदान की जाए, और जब तक सभी परिवार वापस शांतिपूर्ण ढंग से अपने घर में वापस नहीं जा पाते, तब तक परिवारों के लिए कही सुरक्षित घर की व्यवस्था की जाए।