लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और धन के दुरुपयोग के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। जांच के दौरान पता चला है कि मंदिर परिसर के CCTV सिस्टम में केवल 45 दिनों का बैकअप सुरक्षित रखा जाता है, जिसके कारण पुराने फुटेज उपलब्ध नहीं हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए कथित अनियमितताओं की समयरेखा तैयार करना कठिन हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, SIT अब बैंक रिकॉर्ड, दान गिनती से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डेटा और कर्मचारियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश कर रही है। टीम अब तक कई कर्मचारियों, ट्रस्ट से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर चुकी है।
जांच के दौरान CCTV फुटेज की सीमित उपलब्धता के कारण टीम को दान पेटियों से नकदी की निकासी, गिनती प्रक्रिया और धन जमा करने के विभिन्न चरणों की पुष्टि के लिए वैकल्पिक साक्ष्यों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इसी वजह से बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
SIT ने अब तक बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए हैं और कई पेन ड्राइव में जांच से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित किए गए हैं। टीम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दान राशि के प्रबंधन में कहीं कोई गड़बड़ी हुई या नहीं और यदि हुई तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT को निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट सौंपनी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा है कि जांच पूरी होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। ऐसे में CCTV फुटेज की अनुपलब्धता जांच को भले ही मुश्किल बना रही हो, लेकिन SIT अन्य तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के जरिए मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।