अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
फरीदाबाद, 23 फरवरी। फरीदाबाद में असुरक्षित रक्त चढ़ाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें दो थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे एचआईवी संक्रमित हो गए। दोनों बच्चे नियमित रूप से रक्त चढ़ाने के लिए आए थे।
प्राथमिक स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि रक्तदाता संक्रमण के ‘विंडो पीरियड’ में रहा हो सकता है। इस अवधि में सामान्य जांच से एचआईवी संक्रमण का पता नहीं चल पाता। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रचलित एलाइजा जांच में एंटीबॉडी की पहचान की जाती है, जबकि संक्रमण के शुरुआती चरण में एंटीबॉडी बनने में समय लगता है।
मामला सामने आने के बाद इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में की गई। थैलेसीमिया मरीजों के लिए कार्यरत संस्था ‘फाउंडेशन अगेंस्ट थैलेसीमिया’ के महासचिव रविंद्र डुडेजा ने राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए संबंधित एजेंसियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के लिए Central Drugs Standard Control Organization (सीडीएससीओ) और राज्य के औषधि नियंत्रण विभाग की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि रक्त जांच या आपूर्ति प्रक्रिया में कहां चूक हुई। स्वास्थ्य विभाग फरीदाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी जयंत आहूजा ने कहा कि संबंधित रक्त उनके विभाग से जारी नहीं हुआ है और संभव है कि बाहर के किसी ब्लड बैंक से लिया गया हो। वहीं वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी कृष्ण कुमार गर्ग ने बताया कि जांच जारी है और फिलहाल अधिक जानकारी साझा नहीं की जा सकती।
सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सभी ब्लड बैंकों में अत्याधुनिक जांच प्रणाली, विशेषकर नेट (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) जांच अनिवार्य की जाए। साथ ही रक्त की गुणवत्ता की पारदर्शी निगरानी और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। गौरतलब है कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। ऐसे मरीजों को नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। समय पर जांच और उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है, लेकिन रक्त की सुरक्षा में चूक गंभीर परिणाम ला सकती है।