अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया I
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर Yuvraj Singh ने अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि टीम मैनेजमेंट की ओर से स्पष्टता न मिलने के कारण वह असमंजस में थे, लेकिन MS Dhoni की ईमानदार सलाह ने उन्हें सही निर्णय लेने में मदद की।
युवराज सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा कि अपने करियर के अंतिम दौर में वह लगातार टीम से अंदर-बाहर हो रहे थे। उस समय न तो Virat Kohli (कप्तान), न ही कोच Ravi Shastri और न ही National Cricket Academy ने उन्हें यह साफ तौर पर बताया कि भविष्य में उन्हें टीम में जगह मिलेगी या नहीं।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति में उन्होंने धोनी को फोन किया। धोनी ने उन्हें साफ शब्दों में बताया कि चयनकर्ता अब भविष्य की टीम बना रहे हैं और वह योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं। युवराज के मुताबिक, “धोनी की इस साफगोई ने मुझे वह स्पष्टता दी, जो मुझे कहीं और से नहीं मिल रही थी।”
युवराज ने यह भी आरोप लगाया कि टीम मैनेजमेंट ने उन पर फिटनेस को लेकर दबाव बनाया। उनसे कहा गया कि वह ‘यो-यो टेस्ट’ पास नहीं कर पाएंगे, इसलिए उन्हें संन्यास लेने पर विचार करना चाहिए। हालांकि, युवराज ने साफ कहा कि संन्यास लेना उनका व्यक्तिगत फैसला होगा।
कमेंट्री से दूरी बनाए रखने के सवाल पर युवराज ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों के कारण उन्होंने इस क्षेत्र से दूरी बनाई। उन्होंने कहा कि खेल की आलोचना स्वीकार्य होती है, लेकिन निजी टिप्पणियां दिल में रह जाती हैं।
शानदार करियर की झलक:
युवराज सिंह ने साल 2000 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया और 2019 में संन्यास लिया। उन्होंने भारत के लिए 300 से अधिक वनडे, 50 से ज्यादा टी-20 और 40 टेस्ट मैच खेले।
- 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा
- 2011 वर्ल्ड कप में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’
- इंग्लैंड के खिलाफ 6 गेंदों पर 6 छक्के
- टी-20 में भारत के लिए सबसे तेज अर्धशतक (12 गेंद)
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग जीतकर वापसी करना उनके करियर की सबसे प्रेरणादायक कहानी रही।
युवराज सिंह का यह खुलासा भारतीय क्रिकेट के अंदरूनी हालात और खिलाड़ियों के साथ संवाद की कमी को उजागर करता है। साथ ही यह भी दिखाता है कि एक सच्ची सलाह किस तरह किसी खिलाड़ी के करियर का अहम मोड़ बन सकती है।