लाल मिट्टी से सजी सदियों पुरानी शिल्प परंपरा

बांकुड़ा का टेराकोटा घोड़ा: परंपरा, आस्था और लोककला का अनोखा प्रतीक

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में कारीगरों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक टेराकोटा घोड़े, जो क्षेत्र की लोक-आस्था और प्राचीन हस्तशिल्प परंपरा का प्रतीक हैं।

By : Local News of India
बांकुड़ा का टेराकोटा घोड़ा: परंपरा, आस्था और लोककला का अनोखा प्रतीक

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में कारीगरों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक टेराकोटा घोड़े, जो क्षेत्र की लोक-आस्था और प्राचीन हस्तशिल्प परंपरा का प्रतीक हैं।

आकांशा खटाना 
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले का प्रसिद्ध टेराकोटा घोड़ा केवल एक सुंदर हस्तशिल्प नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की परंपरा, लोक-आस्था और ऐतिहासिक विरासत का अहम प्रतीक माना जाता है। लाल मिट्टी से बने ये घोड़े बांकुड़ा की पहचान बन चुके हैं और देश-विदेश में भी अपनी अलग जगह बना चुके हैं।

स्थानीय लोकमान्यता के अनुसार इन मिट्टी के घोड़ों का धार्मिक महत्व भी है। विशेष रूप से धर्मराज देव की पूजा में लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर टेराकोटा घोड़े देवता को अर्पित करते हैं। इस कारण यह शिल्प स्थानीय संस्कृति और आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ है। कई स्थानीय इतिहासकारों का मानना है कि इस तरह की माटी कला की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

बांकुड़ा के पंचमुड़ा और आसपास के इलाकों के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखे हुए हैं। यहां बनने वाले टेराकोटा घोड़ों की पहचान उनकी लंबी गर्दन, खड़े कान और सुडौल शरीर से होती है। यह पारंपरिक शैली सदियों से चली आ रही है। पंचमुड़ा के कारीगर गोपाल पाल ने बताया, “हमारे परिवार में चार पीढ़ियों से टेराकोटा घोड़े बनाए जा रहे हैं। यह केवल हमारा पेशा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और परंपरा है।”

वहीं स्थानीय निवासी बाबूलाल महतो ने कहा, “धर्म ठाकुर की पूजा में मिट्टी के घोड़े चढ़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है। मन्नत पूरी होने पर लोग यहां आकर घोड़ा चढ़ाते हैं।” स्थानीय शोधकर्ता पेशे से शिक्षक शंभूनाथ बनर्जी के अनुसार, “बांकुड़ा का टेराकोटा घोड़ा आज भारतीय हस्तशिल्प का एक प्रतीक बन चुका है। भारतीय हस्तशिल्प के आधिकारिक लोगो में भी इसका उपयोग इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है।”

स्टेला क्रैम्रिश जैसी विदेशी कलाविदों ने बांकुड़ा घोड़े को "भारतीय लोक-कला का आदिम और शाश्वत प्रतीक" मानकर वैश्विक पहचान दिलाई है। स्थानीय कारीगरों का कहना है कि इस पारंपरिक कला को बचाए रखने के लिए इसे बाजार और सम्मान दोनों मिलना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक शिल्पकला से जुड़ी रह सकें।

संबंधित सामग्री

जालंधर की फैक्ट्री में भीषण आग, कर्मचारियों में मची चीख-पुकार

जालंधर की फैक्ट्री में भीषण आग, कर्मचारियों में मची चीख-पुकार

जालंधर की फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। कर्मचारियों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच दमकल टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया।

बैडमिंटन खेलते-खेलते खूनी खेल! 9 साल के बच्चे की हत्या

बैडमिंटन खेलते-खेलते खूनी खेल! 9 साल के बच्चे की हत्या

बैडमिंटन खेलते समय शटलकॉक को लेकर हुए मामूली विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। विवाद के दौरान 9 साल के मासूम पर चाकू से हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।

इमाम-उल-हक की चोट पर भड़के आकिब जावेद, बोले- होगी जांच; 7 खिलाड़ियों को हटाने का भी किया बचाव

इमाम-उल-हक की चोट पर भड़के आकिब जावेद, बोले- होगी जांच; 7 खिलाड़ियों को हटाने का भी किया बचाव

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खराब प्रदर्शन के बाद PCB ने बड़ा बदलाव किया है। सात खिलाड़ियों को टीम से बाहर भेजने के साथ कोचिंग स्टाफ में भी बदलाव किया गया है।

दिल्ली में कॉन्स्टेबल पर पत्नी की हत्या का आरोप, गोली मारकर सड़क पर छोड़ी डेडबॉडी

दिल्ली के पूर्वी जिले में पुलिस कॉन्स्टेबल पर पत्नी की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा है। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, पुलिस जांच में जुटी है।

18 साल बाद टूटा IPL का सबसे सफल रिश्ता, CSK से अलग हुए स्टीफन फ्लेमिंग

CSK और स्टीफन फ्लेमिंग का 18 साल पुराना साथ खत्म हो गया है। पांच बार की IPL चैंपियन टीम के कोच रहे फ्लेमिंग ने भावुक संदेश के साथ फ्रेंचाइजी को अलविदा कहा।