गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
पश्चिम बंगाल की राजनीति में Suvendu Adhikari का नाम उन नेताओं में शामिल है, जिनका राजनीतिक सफर काफी चर्चित और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक समय था जब उन्हें मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का बेहद करीबी और भरोसेमंद रणनीतिक साथी माना जाता था।
नंदीग्राम आंदोलन से लेकर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक अभियानों में उनकी भूमिका अहम रही, जिससे उनकी पकड़ जमीनी स्तर पर मजबूत होती गई। लेकिन समय के साथ राजनीतिक मतभेद बढ़े और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से दूरी बना ली।
इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया और पश्चिम बंगाल की राजनीति में विपक्ष के सबसे मजबूत चेहरों में से एक बनकर उभरे। आज वे राज्य में सत्ता पक्ष के खिलाफ सबसे मुखर आवाजों में गिने जाते हैं।
उनका यह राजनीतिक बदलाव बंगाल की सियासत में “पार्टी परिवर्तन और नेतृत्व संघर्ष” की बड़ी कहानी के रूप में देखा जाता है, जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित किया है।