गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
West Bengal की राजनीति में इस समय वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद छिड़ा हुआ है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि SIR यानी Special Intensive Revision प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिसका असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषण में सामने आया है कि कई विधानसभा और लोकसभा सीटों पर जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा। ऐसे में हटाए गए मतदाताओं की संख्या और चुनावी परिणामों के बीच संबंध को लेकर बहस तेज हो गई है।
विपक्ष का दावा है कि जिन इलाकों में वोटर लिस्ट से ज्यादा नाम हटाए गए, वहां चुनावी समीकरण भी बदले दिखाई दिए। वहीं सत्तापक्ष और चुनावी अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और दस्तावेजी सत्यापन के आधार पर की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, SIR जैसी प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी या डुप्लीकेट वोटरों की पहचान करना होता है, लेकिन जब चुनावी मुकाबला बेहद करीबी हो, तब मतदाता सूची में छोटे बदलाव भी राजनीतिक असर पैदा कर सकते हैं।
इस मुद्दे पर अब राजनीतिक दल डेटा और बूथ स्तर के आंकड़ों के जरिए अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं। आने वाले समय में यह मामला और ज्यादा राजनीतिक तथा कानूनी बहस का केंद्र बन सकता है।