झापा में नेपाल-चीन औद्योगिक पार्क पर सियासत तेज, बालेन शाह ने घोषणा-पत्र से हटाया मुद्दा

घोषणा-पत्र से परियोजना हटाने पर विवाद

झापा में नेपाल-चीन औद्योगिक पार्क पर सियासत तेज, बालेन शाह ने घोषणा-पत्र से हटाया मुद्दा

झापा-5 में चुनावी मुकाबले के बीच बालेन शाह ने नेपाल-चीन मैत्री औद्योगिक पार्क को घोषणा-पत्र से हटाया। परियोजना, बीआरआई और भारत की सुरक्षा चिंताओं पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

झापा में नेपाल-चीन औद्योगिक पार्क पर सियासत तेज बालेन शाह ने घोषणा-पत्र से हटाया मुद्दा

औद्योगिक पार्क मुद्दे पर आमने-सामने शाह और ओली। | LNI.ONE

आकांशा खटाना 
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 

झापा के दमक में चीन के अरबों रुपए के निवेश से बन रहे नेपाल-चीन मैत्री औद्योगिक पार्क के मुद्दे को राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेंद्र (बालेन) शाह ने सोमवार को जारी अपने चुनावी घोषणा पत्र से इसे हटा दिया। शाह झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चुनौती दे रहे हैं।

यह परियोजना चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरू की गई बहु-महाद्वीपीय आधारभूत संरचना योजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा है। फरवरी 2021 में ओली ने झापा जिले में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। यह मेगा परियोजना झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में आती है। यह ओली का अपना क्षेत्र है। शाह के यहां से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद यह क्षेत्र नेपाल के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का केंद्र बन गया है।

पांच मार्च को होने वाले चुनाव से पहले दोनों नेताओं ने अपने-अपने चुनावी एजेंडे सार्वजनिक कर दिए हैं। ओली ने पिछले मंगलवार जारी अपने 41 सूत्रीय ‘प्रतिबद्धता पत्र’ में औद्योगिक पार्क के निर्माण और उसे पूरा कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है। वहीं शाह ने इसे अपने घोषणा-पत्र में शामिल नहीं किया है। शाह के सहयोगी कुमार व्यंजनकार ने संक्षिप्त टिप्पणी में कहा, “हम परियोजना और उससे जुड़े विवादों से अवगत हैं, इसलिए हमने इसे शामिल नहीं करने का निर्णय लिया।” चार दिसंबर 2024 में ओली की चीन यात्रा के दौरान नेपाल और चीन के बीच बेल्ट एंड रोड कॉपरेटिव फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें नेपाल-चीन मैत्री औद्योगिक पार्क समेत 10 परियोजनाओं को सूचीबद्ध किया गया।

परियोजना को घोषणा-पत्र से हटाए जाने के बाद औद्योगिक पार्क परियोजना समिति के अध्यक्ष गोविंद थापा ने सोमवार को फेसबुक पर लंबी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि परियोजना में देरी का कारण नेपाल के भीतर की समस्या नहीं, बल्कि “विदेशी बाधाएं” हैं। उन्होंने कहा कि यह औद्योगिक पार्क आम जनता के लिए वस्तुओं के उत्पादन हेतु बनाया जा रहा है, न कि हथियार या मिसाइल बनाने के लिए, और इससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने आरएसपी और बालेन शाह पर विदेशी निवेश का विरोध करने का आरोप भी लगाया।

यह परियोजना नेपाल-भारत सीमा के निकट स्थित है, विशेषकर संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है) के पास। यह संकरा भूभाग पूर्वोत्तर भारत को शेष भारत से जोड़ता है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस स्थान को लेकर भारत सहित बाहरी चिंताएं मौजूद हैं।

कई विशेषज्ञ और विदेश राजनीतिक मामलों के जानकार चीन द्वारा भारतीय सीमा क्षेत्र के पास बनाए जा रहे इस औद्योगिक पार्क को लेकर भारत की संवेदनशीलता और सुरक्षा को ध्यान में रखने का लगातार सुझाव देते रहे हैं। नेपाल में भी राजनीतिक मामलों के जानकार और पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा के विदेश मामलों के सलाहकार रह चुके अरुण सुवेदी ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर सतर्क है और नेपाल को अपनी संप्रभुता से समझौता किए बिना पड़ोसी देशों की सुरक्षा संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना चाहिए।

परियोजना का विकास ल्हासा आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी विकास क्षेत्र जिंगपिंग संयुक्त निर्माण कंपनी द्वारा किया जा रहा है। निवेश बोर्ड नेपाल (आईबीएन) की 47वीं बैठक में इस परियोजना के लिए 64 अरब रुपये के चीनी निवेश को मंजूरी दी गई थी। प्रस्तावित औद्योगिक पार्क दमक के रतुवा और मावा नदियों के बीच लगभग 2,200 बीघा (लगभग 1,489.98 हेक्टेयर) क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित की जाएगी। अब तक 26 चीनी कंपनियां पार्क में संचालन शुरू करने की प्रतिबद्धता जता चुकी हैं, जबकि 98 अन्य कंपनियों का प्रस्ताव विभिन्न चरणों में विचाराधीन हैं।

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