गुरप्रीत कालरा
लोक्ला न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
भारतीय राजनीति में बीजेपी की रणनीति पिछले कुछ वर्षों में काफी बदलती नजर आई है। पार्टी अब सिर्फ अपने पुराने नेताओं पर ही नहीं, बल्कि दूसरी पार्टियों से आने वाले प्रभावशाली चेहरों पर भी बड़ा दांव खेल रही है।
Suvendu Adhikari इसका सबसे बड़ा उदाहरण माने जा रहे हैं। कभी TMC के बड़े नेता रहे शुभेंदु ने बीजेपी का दामन थामने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे।
इसी तरह Samrat Choudhary ने भी अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद बीजेपी में तेजी से अपनी जगह बनाई और बड़े पद तक पहुंचे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी क्षेत्रीय प्रभाव वाले नेताओं को शामिल कर स्थानीय समीकरण मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे पार्टी को उन राज्यों में फायदा मिला जहां पहले उसकी पकड़ कमजोर मानी जाती थी।
हालांकि विपक्ष इसे “आउटसोर्स राजनीति” बताकर निशाना साधता रहा है, लेकिन बीजेपी समर्थकों का कहना है कि पार्टी में आने के बाद नेताओं को उनके प्रदर्शन के आधार पर जिम्मेदारी दी जाती है।