लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी संदेश देने वाला फेरबदल देखने को मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में विभागों के पुनर्वितरण के तहत विजय कुमार सिन्हा से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग वापस ले लिया गया है। यह विभाग अब सम्राट चौधरी के पास पहुंच गया है, जिसके बाद NDA की अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विजय कुमार सिन्हा बिहार BJP के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय से संगठन तथा सरकार दोनों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। हालांकि हालिया फेरबदल को उनके राजनीतिक कद में कमी के तौर पर भी देखा जा रहा है। दूसरी ओर सम्राट चौधरी की ताकत बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव और जातीय-सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए BJP नेतृत्व नई रणनीति पर काम कर रहा है। सम्राट चौधरी को संगठन और सरकार दोनों में मजबूत भूमिका देकर पार्टी OBC वोट बैंक को साधने की कोशिश कर सकती है।
हालांकि BJP नेताओं का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक फेरबदल है और सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। लेकिन विपक्ष इसे NDA के भीतर शक्ति संघर्ष और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देख रहा है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह विजय सिन्हा के राजनीतिक प्रभाव में गिरावट की शुरुआत है या फिर उन्हें भविष्य में किसी बड़ी भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है। बिहार की राजनीति में इस फेरबदल के कई मायने निकाले जा रहे हैं।