अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नई दिल्ली, 23 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ज्ञान, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प को सफलता तथा प्रगति का मूल आधार बताया है। उन्होंने अज्ञात को जानने, ज्ञात पर विश्वास रखने और आरंभ किए गए कार्य को पूर्ण करने के संकल्प का संदेश देते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक एआई समिट में विश्व समुदाय ने भारत की क्षमता की सराहना की है। उन्होंने इसे देश के युवाओं की दूरदृष्टि और तकनीक के प्रति सकारात्मक सोच का परिणाम बताया। उन्होंने लिखा कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत के युवा जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, वह पूरी मानवता के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषित साझा किया—
“अविज्ञातस्य विज्ञानं, विज्ञातस्य च निश्चयः।
आरम्भः कर्मणां शश्वदारब्धस्यान्तदर्शनम्॥”
इसका अर्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जो अज्ञात है उसे जानने का प्रयास करना, जो ज्ञात है उस पर दृढ़ विश्वास रखना और जिस कार्य की शुरुआत की जाए उसे अंत तक पहुंचाने का संकल्प रखना आवश्यक है। यही सोच व्यक्ति और राष्ट्र, दोनों को निरंतर प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाती है।