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मिट्टी का घर, सोलर हीट और बिना फ्लश टॉयलेट... ऐसा है सोनम वांगचुक का इको-फ्रेंडली लद्दाखी घर

सोनम वांगचुक का लद्दाख स्थित इको-फ्रेंडली घर पारंपरिक मिट्टी की तकनीक और आधुनिक सोलर सिस्टम का मिश्रण है। यह कम ऊर्जा खपत और टिकाऊ जीवनशैली की मिसाल है।

By : Local News of India
मिट्टी का घर, सोलर हीट और बिना फ्लश टॉयलेट... ऐसा है सोनम वांगचुक का इको-फ्रेंडली लद्दाखी घर

सोनम वांगचुक का लद्दाख स्थित इको-फ्रेंडली घर, जहां मिट्टी की दीवारों और सोलर तकनीक से टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा दिया गया है।

लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 
ऋचा बर्नवाल

लेह, लद्दाख: पर्यावरण और टिकाऊ जीवनशैली के लिए पहचाने जाने वाले इंजीनियर व इनोवेटर सोनम वांगचुक का घर इन दिनों चर्चा में है। लद्दाख के कठिन मौसम को ध्यान में रखकर बनाया गया उनका यह घर पारंपरिक लद्दाखी वास्तुकला और आधुनिक तकनीक का अनोखा मेल है। मिट्टी से बने इस घर में ऊर्जा की बचत, प्राकृतिक गर्मी और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख में सौर ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल निर्माण तकनीकों पर काम कर रहे हैं। उनके द्वारा विकसित पैसिव सोलर डिजाइन वाले भवनों में सूरज की रोशनी को अधिकतम इस्तेमाल कर अंदर का तापमान संतुलित रखने की कोशिश की जाती है। ऐसे भवनों में मोटी मिट्टी की दीवारें गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती हैं।

उनका घर आधुनिक सुविधाओं के बजाय प्राकृतिक और टिकाऊ तरीकों को प्राथमिकता देता है। रिपोर्ट के अनुसार, घर में पारंपरिक मिट्टी की संरचना, सोलर हीटिंग सिस्टम और पानी व ऊर्जा बचाने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य लद्दाख जैसे ठंडे और संवेदनशील क्षेत्र में कम संसाधनों के साथ आरामदायक जीवन संभव बनाना है।

सोनम वांगचुक का मानना रहा है कि स्थानीय सामग्री और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर पर्यावरण के अनुकूल समाधान तैयार किए जा सकते हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने लद्दाख में सोलर आधारित इमारतों और अन्य पर्यावरणीय नवाचारों पर काम किया है।

उनकी यह जीवनशैली आज के समय में टिकाऊ निर्माण और ग्रीन आर्किटेक्चर की मिसाल के तौर पर देखी जा रही है। जहां दुनिया ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं वांगचुक का यह मॉडल कम संसाधनों में प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश देता है।

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