लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
ब्रोंकिएक्टेसिस को लेकर किए गए एक अंतरराष्ट्रीय BURDEN सर्वे में इस बीमारी के मरीजों और उनके देखभालकर्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन सामने आया है। यह सर्वे ब्रोंकिएक्टेसिस अंडरस्टैंडिंग एंड रिसर्च ऑन डेली एक्सपीरियंसेज एंड नीड्स (BURDEN) पहल के तहत किया गया, जो इस बीमारी के दैनिक जीवन पर प्रभाव को समझने की पहली बहु-राष्ट्रीय कोशिश है।
यह निष्कर्ष अमेरिकी थोरैसिक सोसाइटी (ATS) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए, जो मई 2026 में ऑरलैंडो, फ्लोरिडा में आयोजित हुआ था। इसमें वल्ल द’हेब्रोन रिसर्च इंस्टीट्यूट (VHIR), बार्सिलोना की विशेषज्ञ ईवा पोलवेरिनो ने वास्तविक दुनिया के आंकड़ों के आधार पर बताया कि इस बीमारी का मरीजों और देखभालकर्ताओं दोनों पर गहरा सामाजिक और भावनात्मक असर पड़ता है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि बार-बार होने वाले एक्ससेर्बेशन (लक्षणों का बढ़ना) बीमारी के बोझ को और गंभीर बना देते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्रोंकिएक्टेसिस की बेहतर निगरानी और प्रबंधन से मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।