लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का OPEC छोड़ने का फैसला सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वेस्ट एशिया की पूरी राजनीति और शक्ति संतुलन को बदलने वाला कदम माना जा रहा है। UAE, जो OPEC का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक था, अब उत्पादन कोटा से मुक्त होकर अपनी रणनीति खुद तय करेगा।
इस फैसले के पीछे सऊदी अरब के साथ बढ़ते मतभेद, ईरान युद्ध से पैदा हुआ तनाव और “strategic autonomy” यानी स्वतंत्र नीति अपनाने की सोच बताई जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, UAE अब अमेरिका और इजराइल के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय गठबंधन बदल रहे हैं। इससे OPEC की पकड़ कमजोर होगी और तेल बाजार में ज्यादा अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
लंबे समय में यह कदम वैश्विक तेल कीमतों, डॉलर की ताकत और भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा रणनीति पर भी असर डाल सकता है।