लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
नई दिल्ली: लंबे संघर्ष और भारी नुकसान के बाद अमेरिका और ईरान ने इस्लामाबाद में एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच हुए युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया और हजारों लोगों की जान चली गई।
रिपोर्टों के अनुसार, चार महीने पहले हुए अमेरिका-इजरायल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य संघर्ष शुरू हुआ था। इस युद्ध में कई लोगों की मौत हुई, जिसमें तीन भारतीय नाविक भी शामिल थे।
नए समझौते के तहत अमेरिका और ईरान ने प्रतिबंधों में राहत देने और व्यापारिक एवं समुद्री नाकेबंदी खत्म करने की दिशा में कदम उठाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच यह समझौता मध्य पूर्व में स्थिरता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
हालांकि, क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। लेबनान में इजरायल की जारी सैन्य कार्रवाई ने इस नाजुक युद्धविराम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी पक्ष जमीनी स्तर पर कितनी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
वैश्विक बाजार भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में स्थिरता का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है।