गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मध्य प्रदेश के रीवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार ने किसानों को समसामयिक कृषि सलाह देते हुए नरवाई (फसल अवशेष) न जलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गेहूं सहित अन्य फसलों की कटाई हार्वेस्टर से कराएं, लेकिन खेतों में अवशेष जलाने से बचें।
उन्होंने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी के लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, भूमि की जलधारण क्षमता कम होती है और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। इसके बजाय किसान स्ट्रा रीपर का उपयोग कर भूसा तैयार कर सकते हैं या अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर जैविक पदार्थ बढ़ा सकते हैं।
डॉ. कुमार ने नाडेप पिट, वर्मी कम्पोस्ट और बायो डाइजेस्टर जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि इससे जैविक खाद और ऊर्जा दोनों प्राप्त की जा सकती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और उत्पादन क्षमता में सुधार होता है।
उन्होंने दलहनी फसलों के अवशेषों को खेत में मिलाने से नाइट्रोजन बढ़ने की बात भी कही। साथ ही उड़द और मूंग में पीला रोग नियंत्रण के लिए इमीडाक्लोप्रिड और अन्य दवाओं के छिड़काव की सलाह दी।
रीवा क्षेत्र में प्याज की फसल में झुलसा रोग के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए उन्होंने किसानों को उपयुक्त फफूंदनाशकों के प्रयोग की सलाह दी, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।