गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
देशभर में E20 यानी 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लागू होने के बाद अब केंद्र सरकार इससे भी आगे बढ़ने की तैयारी में है। सरकार ने संकेत दिया है कि पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% से बढ़ाकर 21% या उससे अधिक किया जा सकता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले ही 1 अप्रैल 2026 से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20% तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) और न्यूनतम RON 95 वाले ईंधन की बिक्री अनिवार्य कर दी है। यह फैसला भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है।
सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने से अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा खर्च बचाया जा सकता है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अनाज से तैयार होता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलती है। साथ ही यह पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है।
हालांकि 20% से अधिक इथेनॉल मिश्रण को लेकर वाहन मालिकों और ऑटो इंडस्ट्री में चिंता भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई पुराने वाहन अभी E20 के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं, ऐसे में E21 या उससे ऊपर की ब्लेंडिंग से माइलेज, इंजन परफॉर्मेंस और मेंटेनेंस पर असर पड़ सकता है।
सरकार फिलहाल चरणबद्ध तरीके से इस बदलाव को लागू करने की दिशा में काम कर रही है। E20 के बाद E85 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण पर भी नीति स्तर पर चर्चा चल रही है, हालांकि इसके लिए बड़े पैमाने पर वाहन तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की जरूरत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत का इंपोर्ट बिल काफी कम हो सकता है और वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी सीमित होगा।
यानी आने वाले समय में पेट्रोल सिर्फ महंगा या सस्ता होने की खबर नहीं रहेगा, बल्कि उसमें इथेनॉल का प्रतिशत भी आम आदमी की जेब और गाड़ी—दोनों पर असर डालेगा।