गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नवादा के संकट मोचन मंदिर मैदान में आयोजित जिला संतमत सत्संग ज्ञान महायज्ञ के दूसरे दिन संतों ने गुरु भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की महत्ता पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान हजारों श्रद्धालु सत्संग में शामिल हुए।
संतमत के प्रणेता Maharshi Mehi Paramhans के शिष्य Swami Pramod Ji Maharaj ने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही जीवन की मुक्ति संभव है। उन्होंने कहा कि बिना गुरु ज्ञान के जीव 84 लाख योनियों में भटकता रहता है और दुखों से मुक्ति नहीं पा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संतमत किसी धर्म का विरोध नहीं करता, बल्कि संतों के बताए मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि गुरु स्वयं ईश्वर का स्वरूप हैं और उनके उपदेशों को आत्मसात करने से ही कल्याण संभव है।
सत्संग में Gautam Buddha का उदाहरण देते हुए बताया गया कि उन्होंने भी राजपाट छोड़कर साधना के माध्यम से मोक्ष प्राप्त किया। संतों ने ईश्वर प्राप्ति के विभिन्न मार्गों और साधना की विधियों पर भी प्रकाश डाला।
धनवा आश्रम के व्यवस्थापक स्वामी शांतानंद जी महाराज और अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी डॉ. विवेकानंद जी महाराज ने भी गुरु की महिमा और मानव जीवन के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन सबसे श्रेष्ठ है और इसका उपयोग साधना के लिए करना चाहिए।
कार्यक्रम में स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने भी लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है और इसे व्यर्थ न गंवाकर साधना के माध्यम से मुक्ति का मार्ग अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई और आयोजन में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।