गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मणिपुर के पहाड़ी और दूर-दराज इलाकों में लंबे समय से अवैध अफीम की खेती सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए राज्य सरकार और विभिन्न एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। वहीं, किसानों के सामने आजीविका का संकट भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है, क्योंकि प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उन्हें लालच और डर के जरिए अफीम की खेती के लिए मजबूर करते रहे हैं।
इस चुनौती से निपटने के लिए मणिपुर पुलिस ने एक सामाजिक पहल करते हुए किसानों को वैकल्पिक आजीविका के रास्ते दिखाने की शुरुआत की है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने बुधवार को बताया कि मणिपुर पुलिस ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर चुराचांदपुर जिले में ‘हिनची’ नामक एक समुदाय-आधारित पहल शुरू की है।
‘हिनची’ का अर्थ है ‘जीवन के बीज’ (Seeds of Life), जो आशा, बदलाव और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस पहल के तहत जिले के तीन ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों को चुना गया, जिन्हें अवैध अफीम की खेती के लिए अतिसंवेदनशील माना गया था।
लगातार संपर्क और संवाद के माध्यम से सभी ग्राम प्रमुखों और 127 लाभार्थी परिवारों को विश्वास में लिया गया। उन्हें वैकल्पिक नकदी फसलों के जरिए टिकाऊ और वैध आजीविका अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत चेन्नई स्थित टेक्नोलॉजी फर्म ‘सेगुला टेक्नोलॉजी’ ने इस परियोजना के लिए 28 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।
इस वित्तीय सहयोग से मणिपुर पुलिस ने लाभार्थी किसानों को लगभग 55,000 किलोग्राम अदरक के बीज, 450 किलोग्राम मटर के बीज और 6,500 केले के पौधे वितरित किए।
आगे चलकर मणिपुर पुलिस, NCB और स्थानीय NGO ‘NARPS’ की संयुक्त टीमें समय-समय पर निगरानी करेंगी, ताकि किसानों को निरंतर मार्गदर्शन, जवाबदेही और फसल कटाई के बाद बाज़ार से जुड़ने में सहायता मिल सके।
पुलिस का कहना है कि ‘हिनची’ केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प का प्रतीक है, जो जोखिम को मजबूती में बदलकर सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है।
राज्य में इस पहल को अफीम की अवैध खेती पर लगाम कसने की दिशा में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।