गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच ईरान के विदेश मंत्री 24 घंटे के भीतर दूसरी बार पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे हैं। इस अचानक दौरे ने क्षेत्रीय कूटनीति को और तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल बातचीत की कोशिशें जारी हैं।
सूत्रों के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य युद्धविराम, समुद्री तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सैन्य दबाव पर चर्चा करना है। हाल के दिनों में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी जहाजों को रोके जाने और तेल आपूर्ति पर असर के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि “यह युद्ध जल्द खत्म होगा।” ट्रंप ने संकेत दिया कि बातचीत के रास्ते खुले हैं और जल्द ही कोई बड़ा समाधान सामने आ सकता है। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब दोनों पक्ष सीधे बातचीत से बचते दिख रहे हैं। इस्लामाबाद में हो रही लगातार बैठकों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ती राजनयिक गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि पर्दे के पीछे बड़े स्तर पर बातचीत चल रही है। दुनिया की नजर अब इस्लामाबाद पर टिकी हुई है।