लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
कॉरपोरेट नौकरी के बजाय ग्रामीण विकास का रास्ता चुनने वाले तीन युवाओं ने गोबर से स्वच्छ ऊर्जा बनाने का अनोखा अभियान शुरू किया। कौशिक यानामंद्रम, पीयूष सोहानी और शंकर रामकृष्णन ने वर्ष 2013 में सस्टेनअर्थ एनर्जी सॉल्यूशंस की स्थापना की। उनका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बायोगैस के माध्यम से सस्ती, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराना था।
युवाओं ने देश के विभिन्न राज्यों में सर्वेक्षण कर पाया कि लाखों किसानों के पास पर्याप्त पशुधन होने के बावजूद बायोगैस का उपयोग बेहद कम हो रहा है। इसका प्रमुख कारण पारंपरिक बायोगैस संयंत्रों का महंगा, जटिल और रखरखाव में कठिन होना था। इसी समस्या का समाधान खोजते हुए उन्होंने ऐसा प्री-फैब्रिकेटेड बायोगैस प्लांट विकसित किया जिसे कम समय में आसानी से स्थापित किया जा सके।
स्टार्टअप का मानना है कि भारत में करोड़ों किसानों के पास दो या तीन गायें हैं। यदि इनमें से अधिक परिवार गोबर से बायोगैस का उपयोग करें तो एलपीजी और जलाऊ लकड़ी पर निर्भरता काफी कम हो सकती है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि ग्रामीण परिवारों के ऊर्जा खर्च में भी कमी आएगी।
संस्थापकों का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल ऊर्जा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है। उनका मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारा जा सकता है और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर टिकाऊ विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।