लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हाइड्रोजन फ्यूल ट्रांसपोर्ट के पायलट ट्रायल शुरू कर दिए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के तहत देश के 10 प्रमुख रूटों पर हाइड्रोजन से चलने वाली बसों और ट्रकों का परीक्षण किया जा रहा है।
यह परियोजना नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 26 मार्च 2025 को मंजूर की गई थी। इसके तहत कुल 37 हाइड्रोजन संचालित वाहन शामिल किए गए हैं, जिनमें 15 फ्यूल सेल आधारित वाहन और 22 हाइड्रोजन इंटरनल कम्बशन इंजन (H2-ICE) वाले वाहन शामिल हैं।
हाइड्रोजन मोबिलिटी में वाहनों को चलाने के लिए हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। फ्यूल सेल तकनीक में हाइड्रोजन से बिजली पैदा कर इलेक्ट्रिक मोटर चलती है, जबकि हाइड्रोजन इंजन तकनीक में संशोधित इंजन के जरिए हाइड्रोजन को जलाकर वाहन संचालित किए जाते हैं।
इन पायलट ट्रायल के लिए चुने गए 10 रूटों में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, पुणे-मुंबई, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, भुवनेश्वर-कोणार्क-पुरी, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, जमशेदपुर-कलिंगानगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि, कोच्चि-एडप्पल्ली, जामनगर-अहमदाबाद और NH-16 विशाखापत्तनम-बय्यवरम शामिल हैं।
इन रूटों पर हाइड्रोजन वाहनों के संचालन के लिए 9 हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस पायलट परियोजना के लिए करीब 208 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
परियोजना में कई बड़ी कंपनियां भाग ले रही हैं, जिनमें TATA Motors, Reliance Industries, NTPC, Ashok Leyland और Indian Oil प्रमुख हैं। सरकार का उद्देश्य हाइड्रोजन आधारित परिवहन को बढ़ावा देकर प्रदूषण कम करना और स्वच्छ ऊर्जा वाले भविष्य की ओर बढ़ना है।