लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
सनातन धर्म में मृत्यु के बाद होने वाले संस्कारों का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक ग्रंथ गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार से जुड़ी कई परंपराओं और मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। इन्हीं में से एक मान्यता यह है कि रात के समय शव को अकेला नहीं छोड़ा जाता।
धार्मिक विश्वास के अनुसार, मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार होने तक परिजन शव के पास रहकर मंत्र, भजन या ईश्वर का स्मरण करते हैं। इसे दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान और श्रद्धांजलि का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि इस दौरान दीपक जलाना, भगवान का स्मरण करना और शव के पास किसी न किसी व्यक्ति का मौजूद रहना शुभ माना जाता है। हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं हैं और अलग-अलग क्षेत्रों तथा समुदायों में इनकी परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।
धर्माचार्यों के अनुसार, इन रीति-रिवाजों का उद्देश्य दिवंगत के प्रति सम्मान प्रकट करना और परिवार को आध्यात्मिक संबल प्रदान करना है।