गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण परिचर्चा में भारतीय ज्ञान परंपरा की महानता और विशिष्टता पर प्रकाश डाला गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा विश्व में अद्वितीय रही है और इसे संरक्षित रखने के लिए प्राचीन आचार्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कार्यक्रम में आचार्य सायण के कृतित्व और व्यक्तित्व पर गहन चिंतन-मंथन किया गया। ‘महामनीषी’ पुस्तक पर चर्चा करते हुए लेखक पद्मनाभ पाण्डेय ने बताया कि आचार्य सायण न केवल वेदों के महान भाष्यकार थे, बल्कि एक कुशल प्रशासक, योद्धा और आदर्श गृहस्थ भी थे।
उन्होंने कहा कि वेद सनातन परंपरा के आधार हैं और इन्हें संरक्षित रखने में आचार्यों की अहम भूमिका रही है। आचार्य सायण का योगदान इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा।
इस अवसर पर संतोष तिवारी, मृत्युंजय दीक्षित, राजीव द्विवेदी, जीशान अहमद, गौसियार खानम, जय प्रकाश पाण्डेय और विजय त्रिपाठी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।