गुरप्रीत कालरा
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
संसद का बजट सत्र शनिवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के अनिश्चितकाल के लिए स्थगन के साथ समाप्त हो गया। 18वीं लोकसभा का यह सातवां सत्र राजनीतिक रूप से काफी उथल-पुथल भरा रहा और विशेष बैठकों के कारण इसे निर्धारित समय से आगे भी बढ़ाया गया।
सत्र के दौरान सरकार द्वारा प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। यह विधेयक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और परिसीमन प्रक्रिया लागू करने से संबंधित था।
विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया। इसे पारित करने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका।
लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने अपने समापन संबोधन में बताया कि सदन की कार्य-उत्पादकता लगभग 93 प्रतिशत रही। इस दौरान कुल 41 बैठकें आयोजित की गईं। सत्र में 12 सरकारी विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 9 पारित हुए। इनमें वित्त विधेयक 2026 सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक शामिल हैं।
राज्यसभा के सभापति C. P. Radhakrishnan ने कहा कि उच्च सदन ने कुल 157 घंटे से अधिक कार्य किया और इसकी उत्पादकता लगभग 110 प्रतिशत रही। उन्होंने सदस्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह सत्र देश की विकास दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहा।
विशेष बैठकों के दौरान सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि विपक्ष ने इन प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया और आरोप लगाया कि इससे कुछ राज्यों के राजनीतिक प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
महिला आरक्षण विधेयक के विफल होने के बाद सरकार ने परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी वापस ले लिया।
सत्र के दौरान कई बार हंगामा, विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। इसके बावजूद 2026-27 का केंद्रीय बजट पारित कर लिया गया।
संसद के स्थगन के साथ महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे फिलहाल अधर में लटक गए हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में इन मुद्दों पर फिर से चर्चा हो सकती है।