सारण में ट्रैफिक जाम से बेहाल शहर, परीक्षा केंद्रों तक दौड़ते छात्र

सारण में यातायात व्यवस्था ध्वस्त

सारण में ट्रैफिक जाम से बेहाल शहर, परीक्षा केंद्रों तक दौड़ते छात्र

सारण में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान भीषण जाम से यातायात व्यवस्था चरमराई। छात्र समय पर केंद्र नहीं पहुंच पा रहे, एम्बुलेंस तक फंस रही हैं। जानिए पूरी खबर.....

सारण में ट्रैफिक जाम से बेहाल शहर परीक्षा केंद्रों तक दौड़ते छात्र

सारण शहर की मुख्य सड़क पर परीक्षा के दौरान लगा भीषण ट्रैफिक जाम | LNI.ONE

आकांशा खटाना 
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 

सारण जिला मुख्यालय की सड़कों पर इन दिनों केवल परीक्षार्थी ही परीक्षा नहीं दे रहे बल्कि शहर की संपूर्ण यातायात व्यवस्था भी एक कठिन अग्निपरीक्षा से गुजर रही है।

सीबीएसई और बिहार बोर्ड की परीक्षाओं के दोहरे दबाव ने शहर की सूरत इस कदर बिगाड़ दी हैं। आलम यह है कि शहर की कोई ऐसी गली या मोहल्ला अछूता नहीं बचा है जहाँ जाम ने अपने पैर न पसारे हों। वाहनों का दबाव इतना अधिक है कि एम्बुलेंस को रास्ता देने के लिए एक इंच जमीन भी शेष नहीं बचती। दूसरी ओर सड़कों पर परीक्षा केंद्रों तक पहुँचने के लिए हाँफते-दौड़ते परीक्षार्थी नजर आ रहे है। कई केंद्रों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि जाम के कारण छात्र समय पर परीक्षा हॉल नहीं पहुँच पा रहे हैं।

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने बड़े तामझाम के साथ विशेष ट्रैफिक थाने का निर्माण किया। इतना ही नहीं सुचारू संचालन के लिए पुलिस उपाधीक्षक स्तर के पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति भी की गई। उम्मीद थी कि इन भारी-भरकम प्रशासनिक बदलावों से सड़कों पर राहत मिलेगी, लेकिन धरातल पर हकीकत इसके ठीक उलट है।

छपरा व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता व समाजसेवी जितेंद्र कुमार का कहना है कि प्रशासन के तमाम दावों और नई नियुक्तियों के बावजूद जाम की समस्या घटने के बजाय और अधिक विकराल हो गई है। उनके अनुसार ढांचागत चुनौतियों और प्रशासनिक उदासीनता का ऐसा घालमेल पहले कभी नहीं देखा गया। जब जिम्मेदार अधिकारी और थाने धरातल पर अपना प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे, तो जनता का भरोसा सिस्टम से उठने लगा है।

शहर की हृदयस्थली कहे जाने वाले नगर पालिका चौक पर जाम से जूझ रहे पूर्व प्रधानाचार्य रामदयाल शर्मा अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि शहर विकास और विनाश के बीच फँस गया है। मुख्य सड़क पर निर्माणाधीन डबल डेकर पुल ने मार्ग को इतना संकरा कर दिया है कि दो गाड़ियाँ एक साथ नहीं निकल पातीं। वही जो वैकल्पिक मार्ग निचले इलाकों की ओर जाते हैं वे पूरी तरह अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। अवैध कब्जों, सड़कों पर पसरी गंदगी और अव्यवस्था के कारण आम लोग इन रास्तों पर जाने से कतराते हैं। परिणामस्वरूप शहर का सारा ट्रैफिक दबाव एकमात्र लाइफलाइन मानी जाने वाली डाक बंगला रोड पर आ गया है। यह सड़क अपनी क्षमता से दस गुना ज्यादा बोझ सह रही है, जिससे हर दस मिनट पर यहाँ ट्रैफिक लॉक जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

सड़कों पर तैनात पुलिसकर्मी प्रयास तो कर रहे हैं, लेकिन उनकी मेहनत बेतरतीब पार्किंग और वाहनों के बेतहाशा दबाव के आगे बौनी साबित हो रही है। यदि जिला प्रशासन ने समय रहते वन-वे ट्रैफिक का कड़ाई से पालन नहीं कराया और अतिक्रमणकारियों पर बुलडोजर का प्रहार नहीं किया तो यह जाम किसी दिन बड़े हादसे या जानमाल की हानि का कारण बन सकता है। प्रशासन कागजी खानापूर्ति छोड़कर धरातल पर कड़े निर्णय ले, ताकि छात्रों का भविष्य और बीमारों की सांसें सुरक्षित रह सकें।

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