पश्चिम-एशिया-तनाव-ब्रेंट-क्रूड-119-डॉलर-तेल-कीमत

पश्चिम एशिया तनाव से उछले तेल के दाम, ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर के करीब

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

By : Local News of India
पश्चिम एशिया तनाव से उछले तेल के दाम, ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर के करीब

पश्चिम-एशिया-तनाव-ब्रेंट-क्रूड-119-डॉलर-तेल-कीमत

अंजली गुप्ता 
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 

नई दिल्ली, 09 मार्च। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

बीते एक सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 113 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है।

आज ब्रेंट क्रूड ने 107.92 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की और कुछ ही समय में बढ़कर 119.14 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाद में इसमें हल्की गिरावट भी देखी गई। भारतीय समयानुसार सुबह करीब 11 बजे ब्रेंट क्रूड 24 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 115.57 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।

इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने 107.81 डॉलर प्रति बैरल से कारोबार शुरू किया और तेजी के साथ 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। बाद में इसमें थोड़ी गिरावट आई और यह करीब 113.65 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता देखा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तेल उत्पादन में कटौती है। ओपेक प्लस से जुड़े इराक ने अपने तीन प्रमुख दक्षिणी ऑयल फील्ड्स में उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत की कटौती कर दी है। इससे पहले जहां इन क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 43 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होता था, वहीं अब यह घटकर लगभग 13 लाख बैरल रह गया है।

इसके अलावा कुवैत ने भी कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती का संकेत दिया है। तेल विशेषज्ञों का मानना है कि तेल ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमलों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।

अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद ईरान ने भी संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन के तेल ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इससे मिडिल ईस्ट के तेल उत्पादक देशों पर दबाव बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर भारत जैसे उन देशों पर पड़ेगा, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करते हैं।

भारत अपनी जरूरत का करीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतें 110 डॉलर से ऊपर रहने पर देश के आयात बिल में बढ़ोतरी की आशंका है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

संबंधित सामग्री

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही घटी

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही घटी

अमेरिका-ईरान संघर्ष बढ़ने के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में तेज गिरावट दर्ज की गई, हालांकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं।

कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर के करीब, अमेरिका-ईरान वार्ता से बाजार में गिरावट

कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर के करीब, अमेरिका-ईरान वार्ता से बाजार में गिरावट

अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गई हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में नरमी देखने को मिल रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम होते ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम होते ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। टैंकरों की आवाजाही बढ़ने से वैश्विक बाजार में राहत का माहौल है।

ब्रेंट क्रूड $75 पर, तेल की कीमतें युद्ध के बाद सबसे निचले स्तर पर

ब्रेंट क्रूड $75 पर, तेल की कीमतें युद्ध के बाद सबसे निचले स्तर पर

ब्रेंट क्रूड की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है, जो अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद का सबसे निचला स्तर है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में नरमी जारी है।

रूसी तेल पर अमेरिका सख्त, भारत की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

रूसी तेल पर अमेरिका सख्त, भारत की जेब पर कितना पड़ेगा असर?

अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर दबाव बढ़ाने और रियायती खरीद को सीमित करने की कोशिशों के बीच सवाल उठ रहा है कि इसका भारत पर क्या असर होगा। रूस भारत को लंबे समय से सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध करा रहा है,