‘कब तक हम लेने वाले और वे देने वाले?’ – केंद्र पर स्टालिन का तीखा प्रहार

संघीय बनाम केंद्रीकरण की बहस फिर तेज

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार पर दिया जोर | LNI.one

पिंकी कुमारी 
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया 

चेन्नई, तमिलनाडु विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा कि भारत में संघीय व्यवस्था लागू करने और राज्यों को अधिक स्वायत्तता देने के लिए संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान बताया कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) की नीति “राज्य में स्वायत्तता, केंद्र में संघीय व्यवस्था” है । उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोगों के सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार हमेशा अनुकूल नहीं रही। इसलिए उपलब्ध अधिकारों के आधार पर ही राज्य सरकार सामाजिक न्याय, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में प्रगति कर रही है। भूमि और वित्तीय अधिकारों के लिए अभी और अधिक संघर्ष करना होगा।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ( उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायामूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता में) की रिपोर्ट का पहला भाग जारी किया। रिपोर्ट की प्रतियां सदस्यों को वितरित करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरै (अन्ना) और करुणानिधि ने हमेशा राज्य स्वायत्तता की नीति पर जोर दिया।

एम. के. स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकारों को अधिक अधिकार देने के लिए संविधान में संशोधन की पहल तुरंत शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, "केंद्र सरकार राज्य सरकारों का सम्मान नहीं करती। आखिर कब तक वे देने वाले और हम लेने वाले बने रहेंगे?"

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सभी राज्यों को स्वायत्तता मिलनी चाहिए और केंद्र सरकार को सभी राज्यों के सहयोग से सशक्त संघीय सरकार के रूप में कार्य करना चाहिए। यह मांग किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि भारत की जनता की व्यापक आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि संविधान को अधिक संघीय बनाने से केंद्र कमजोर नहीं होगा। इसके विपरीत, इससे राज्यों को अधिकार और अवसर समान रूप से वितरित होंगे। उन्होंने उदाहरण के तौर पर राज्यपालों के हस्तक्षेप, जीएसटी और शिक्षा निधि जैसे मुद्दे बताए, जिनका समाधान राज्य स्वायत्तता ही है।

स्टालिन ने कहा कि यह नीति राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर, सभी राज्यों के लिए मार्गदर्शक होगी। राज्य मजबूत होंगे तो केंद्र भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि देशभर की सभी राजनीतिक पार्टियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी और भारत को परिपक्व संघीय राष्ट्र बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
 

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