लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसका समर्थन करने की अपील की। अपने लेख में उन्होंने कहा कि भारत 21वीं सदी की विकास यात्रा के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने का अवसर मौजूद है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का आगामी विशेष सत्र केवल विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।
उन्होंने अपने संदेश में देश के सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए असम के रोंगाली बिहू, ओडिशा के महा बिशुबा पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल के पोइला बैशाख, केरल के विषु, तमिलनाडु के पुथांडु और उत्तर भारत के बैसाखी जैसे त्योहारों की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ये पर्व देश में सकारात्मकता, ऊर्जा और नई उम्मीदों का संचार करते हैं।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने 11 अप्रैल से शुरू होने वाली ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती और 14 अप्रैल को भीमराव अंबेडकर की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अवसर सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों की याद दिलाते हैं, जो आधुनिक भारत की नींव हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, खेल, सशस्त्र बलों और कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उनकी बढ़ती भागीदारी इसका प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने के कई प्रयास किए गए हैं। इनसे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन राजनीतिक और विधायी संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी कम है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, अब इस स्थिति को बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं नीति-निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों में शामिल होती हैं, तो शासन अधिक संवेदनशील और संतुलित बनता है। यह केवल प्रतिनिधित्व का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक जवाबदेह और समावेशी बनाने का कदम है।
उन्होंने याद दिलाया कि पिछले कई दशकों से महिला आरक्षण को लेकर प्रयास होते रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। हालांकि, इस विषय पर व्यापक सहमति हमेशा बनी रही है। उन्होंने सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब इसे पूरी तरह लागू करने का समय आ गया है।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि 2029 के लोकसभा चुनाव और भविष्य के विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण के प्रावधान लागू किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह कदम संविधान की समानता और न्याय की भावना के अनुरूप होगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस निर्णय को और टाला गया, तो यह लंबे समय से चले आ रहे असंतुलन को और बढ़ा देगा। उन्होंने इसे पूरे राष्ट्र का विषय बताते हुए सभी सांसदों से इस ऐतिहासिक अवसर का समर्थन करने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह पहल भारत के लोकतंत्र को और अधिक मजबूत, समावेशी और भविष्य के अनुरूप बनाएगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को समान अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।