लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी विधानसभा सीट इस बार राज्य की सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गई है। आमतौर पर शांत रहने वाला यह शहरी क्षेत्र इस बार राजनीतिक, सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों के कारण सुर्खियों में है।
इस सीट के चर्चा में आने की सबसे बड़ी वजह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाए जाना है। इसके चलते यहां तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और वाम दलों के बीच सीधा त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है।
पानीहाटी कोलकाता महानगर क्षेत्र का एक प्रमुख उपनगरीय इलाका है, जो सड़क और उपनगरीय रेल नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यह दमदम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और 29 वार्डों वाली नगरपालिका के अंतर्गत आता है।
ऐतिहासिक रूप से यह सीट वामपंथ का गढ़ रही है, जहां सीपीआईएम ने आठ बार जीत दर्ज की। हालांकि 2011 के बाद से तृणमूल कांग्रेस ने यहां लगातार तीन बार जीत हासिल कर अपना वर्चस्व स्थापित किया है।
इस बार तृणमूल कांग्रेस ने पांच बार के विधायक निर्मल घोष की जगह उनके पुत्र तिर्थंकर घोष को उम्मीदवार बनाया है। आरजी कर अस्पताल कांड से जुड़े विवादों के बाद पार्टी ने यह फैसला लिया, जिसे राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा ने रत्ना देबनाथ को मैदान में उतारकर सहानुभूति और भावनात्मक मुद्दों को केंद्र में लाने की कोशिश की है। वहीं सीपीआईएम ने युवा नेता कलातन दासगुप्ता को उम्मीदवार बनाया है, जो आरजी कर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और संघर्षशील छवि रखते हैं।
मतदाता आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 2.30 लाख मतदाता हैं। अनुसूचित जाति मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 5.19 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम मतदाता पांच प्रतिशत से कम हैं।
हालांकि, पिछले कुछ चुनावों में यहां मतदान प्रतिशत में लगातार गिरावट देखी गई है, जो चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय है।
लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा है, लेकिन भाजपा ने हाल के वर्षों में अपनी स्थिति मजबूत की है और मुख्य चुनौतीकर्ता के रूप में उभरी है। वहीं वाम दल भी धीरे-धीरे अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।
पानीहाटी का सामाजिक-आर्थिक ढांचा भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता है। पहले यह क्षेत्र व्यापार और उद्योग का केंद्र था, लेकिन अब यह मुख्य रूप से आवासीय क्षेत्र बन चुका है, जहां मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं।
कुल मिलाकर, पानीहाटी विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक कारकों की भी परीक्षा बन गया है। तृणमूल अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, भाजपा सहानुभूति लहर पर दांव लगा रही है, जबकि वामपंथ वापसी की उम्मीद कर रहा है। ऐसे में यह सीट आगामी चुनाव में बेहद अहम और रोचक मानी जा रही है।