अंजली गुप्ता
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
भोपाल, 23 फरवरी। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है, ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम बाजार भाव मिलने की स्थिति में नुकसान न उठाना पड़े।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष सरसों का रकबा 28 प्रतिशत बढ़ा है। जनवरी तक बाजार में सरसों का भाव 5500 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा, जबकि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार ने सरसों को भावांतर योजना के तहत शामिल करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि मूंग की बजाय राज्य सरकार का फोकस अब उड़द उत्पादन पर रहेगा। उड़द पर 600 रुपये प्रति किसान प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया गया है, ताकि दलहन उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा चना, मसूर और तुअर के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए भी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। चना और मसूर के उपार्जन के लिए 24 मार्च से 30 मई तक की अवधि निर्धारित की गई है।
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक भैरो सिंह बापू ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया। उन्होंने फसल बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है। इस पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार नुकसान के सर्वे को लेकर गंभीर है और प्रभावित किसानों को राहत राशि देने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक छह जिलों में ओलावृष्टि की सूचना प्राप्त हुई है। विधायकों ने सर्वे प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने पर जोर दिया। कुछ सदस्यों ने धनिया जैसी फसलों को भी फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और मध्य प्रदेश को कृषि-निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि सरकार किसान को “ऊर्जा दाता” बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है।