लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
जौनपुर के तिलकधारी विधि महाविद्यालय, पीलीकोठी में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार सिंह एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। 10 वर्षीय बालक से कुकर्म के आरोप वाले पास्को मामले में दोषमुक्त होने के बाद अब उन पर अदालत में फर्जी साक्ष्य पेश करने का आरोप लगा है।
विशेष पास्को न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रोफेसर समेत अन्य संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि 31 मई 2023 को दर्ज मामले में डॉ. सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 377, 342, 506 और पास्को एक्ट की धारा 5(डी)/6 के तहत आरोप लगाए गए थे। हालांकि, 24 फरवरी 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पास्को) उमेश कुमार द्वितीय ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
अपने बचाव में प्रोफेसर ने अदालत को बताया था कि घटना के समय वे कॉलेज परिसर में मौजूद थे और सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक पीएचडी शोधार्थियों को पढ़ा रहे थे। इस दावे के समर्थन में उन्होंने शोधार्थियों की उपस्थिति पंजिका (रजिस्टर) को साक्ष्य के रूप में पेश किया था। साथ ही शोधार्थी मनोज कुमार गुप्ता और अजय कुमार सिंह ने भी अदालत में गवाही देकर इसे सही बताया था।
हालांकि, पीड़ित पक्ष को इस साक्ष्य पर संदेह हुआ। पीड़ित बालक की मां ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी प्राप्त की, जिसमें खुलासा हुआ कि संबंधित महाविद्यालय में पीएचडी कोर्स वर्क संचालित ही नहीं हुआ था, बल्कि यह विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में आयोजित किया गया था।
इस खुलासे के बाद पीड़ित पक्ष ने अधिवक्ता विकास तिवारी के माध्यम से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने इसे स्वीकार करते हुए डॉ. संतोष कुमार सिंह, मनोज कुमार गुप्ता और अजय कुमार सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
परिवादिनी पक्ष के अधिवक्ता विकास तिवारी ने बताया कि अभियुक्तों ने अदालत को गुमराह करने के लिए झूठी गवाही और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया, जिससे न्याय प्रक्रिया की गरिमा प्रभावित हुई है।
वहीं, पीड़ित की मां ने कहा कि उनके बच्चे के साथ हुए अपराध के बाद अब न्यायालय को भी भ्रमित करने की कोशिश की गई है। उन्होंने दोषियों को सजा दिलाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें आरोपितों को अपना पक्ष रखना होगा।