लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें राज्य में गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया था। सरकार का तर्क है कि हाईकोर्ट का आदेश तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विपरीत है और न्यायालय ने याचिका के दायरे से आगे जाकर फैसला दिया है।
राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि मौजूदा कानून के तहत 10 वर्ष से अधिक आयु की ऐसी गाय, जो खेती या प्रजनन के योग्य नहीं है, सक्षम प्राधिकारी के प्रमाणपत्र के आधार पर वध की अनुमति पा सकती है। इसके अलावा अन्य कानून पशु वध को नियंत्रित करते हैं, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान नहीं करते। सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश विधायिका द्वारा बनाए गए कानून की भावना के विपरीत है।
यह मामला 27 मई को बकरीद से पहले दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर गोवध रोकने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट ने पूरे राज्य में किसी भी दिन गाय और बछड़ों के वध पर पूर्ण रोक लगाने का निर्देश दे दिया। अब इस आदेश की वैधता पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा।