लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई गंभीर जल संकट का सामना कर रही है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले सात प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडार घटकर 7 प्रतिशत से भी कम रह गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार सोमवार सुबह तक इन जलाशयों में केवल 1,00,279 मिलियन लीटर पानी बचा था, जो उनकी कुल उपयोगी क्षमता का मात्र 6.93 प्रतिशत है।
पिछले वर्ष इसी अवधि में इन जलाशयों में लगभग 39.5 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। इस वर्ष मानसून के देर से पहुंचने और जलग्रहण क्षेत्रों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण जल स्तर तेजी से घटा है। मुंबई की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह भातसा, अपर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, मिडिल वैतरणा, तुलसी और विहार जलाशयों पर निर्भर है, जो प्रतिदिन लगभग 4,000 मिलियन लीटर पानी शहर को उपलब्ध कराते हैं।
जल भंडार में लगातार गिरावट को देखते हुए बीएमसी पहले ही औद्योगिक, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निर्माण गतिविधियों के लिए जल आपूर्ति में कटौती कर चुकी है। प्रशासन नागरिकों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और अनावश्यक बर्बादी से बचने की अपील कर रहा है।
मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होने पर जलाशयों के जल स्तर में सुधार हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शहर में बारिश होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी वर्षा होना भी जरूरी है, तभी जल संकट से राहत मिल सकेगी।