लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के कश्मीर संभाग में शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी, मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों और निजी कोचिंग संस्थानों को परिसर में मौजूद सभी पुस्तकों की व्यापक जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसी किसी भी सामग्री की पहचान करना है जिसे आपत्तिजनक, अनुचित या प्रचलित कानूनों एवं राष्ट्रीय हित के विपरीत माना जा सकता है।
डायरेक्टरेट ऑफ स्कूल एजुकेशन कश्मीर (DSEK) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, स्कूल प्रमुखों को कार्यालयों, कक्षाओं, स्टाफ रूम, पुस्तकालयों और अन्य शैक्षणिक परिसरों में रखी सभी पुस्तकों की जांच करनी होगी। यदि किसी पुस्तक में आपत्तिजनक सामग्री मिलती है तो उसकी विस्तृत रिपोर्ट, जिसमें पुस्तक का नाम, लेखक, प्रकाशक, प्रकाशन वर्ष और उपलब्ध प्रतियों की संख्या शामिल होगी, विभाग को भेजनी होगी।
निर्देश में कहा गया है कि समीक्षा के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी ऐसी सामग्री उपलब्ध न हो जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हो, प्रचलित कानूनों का उल्लंघन करती हो, राष्ट्रीय हित के प्रतिकूल हो, शैक्षणिक मूल्यों को प्रभावित करती हो या राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के आयु-उपयुक्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप न हो।
सभी संस्थानों के प्रमुखों को एक अनुपालन प्रमाणपत्र भी देना होगा, जिसमें यह घोषित करना होगा कि उनके संस्थान की सभी पुस्तकों की जांच कर ली गई है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिसर में कोई आपत्तिजनक सामग्री मौजूद नहीं है। साथ ही यह भी प्रमाणित करना होगा कि पुस्तकालय की पुस्तकें NEP 2020 और अन्य लागू नियमों के अनुरूप हैं।
यह कदम हाल ही में कुछ सरकारी स्कूल पुस्तकालयों में कथित रूप से अनुचित सामग्री वाली पुस्तकों को लेकर उठे विवाद के बाद उठाया गया है। इस मामले में प्रशासन ने पहले विभागीय जांच के आदेश दिए थे और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।