लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
नई दिल्ली: भारत का बड़ा हिस्सा भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार देश को भूकंपीय जोखिम के आधार पर ज़ोन-2 से ज़ोन-5 तक बांटा गया है, जिसमें ज़ोन-5 सबसे अधिक और ज़ोन-2 सबसे कम संवेदनशील है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ज़ोन-4 में आती है, जिसे उच्च भूकंपीय जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली के पास कई सक्रिय भ्रंश मौजूद हैं और हिमालयी क्षेत्र में आने वाला बड़ा भूकंप राजधानी को भी प्रभावित कर सकता है। घनी आबादी और कई पुराने भवन नुकसान का खतरा बढ़ाते हैं।
श्रीनगर, गुवाहाटी और पूर्वोत्तर के अधिकांश इलाके, अंडमान-निकोबार तथा कच्छ (गुजरात) ज़ोन-5 में आते हैं, जहां सबसे अधिक भूकंपीय खतरा है। वहीं देहरादून, चंडीगढ़, जम्मू, पटना, अमृतसर, जालंधर और दिल्ली जैसे शहर ज़ोन-4 में शामिल हैं।
मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे और लखनऊ जैसे अधिकांश बड़े शहर ज़ोन-3 में हैं। यहां भी मध्यम से गंभीर तीव्रता के भूकंप आने की संभावना बनी रहती है, इसलिए भूकंपरोधी निर्माण और आपदा तैयारियां जरूरी मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप को रोका या पहले से सटीक समय पर बताया नहीं जा सकता, लेकिन भूकंपरोधी भवन निर्माण, आपदा प्रबंधन की तैयारी और जागरूकता से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।