लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
मुस्कान
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि नागरिकों को सरकार का गुलाम बना दिया जाए और यदि कोई व्यक्ति अपनी बात रखने या विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर दिए जाएं।
अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है, न कि जनता सरकार के प्रति। नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और असहमति जताने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, जिसे अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई के माध्यम से दबाया नहीं जा सकता।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों से यह भी पूछा कि विरोध प्रदर्शनों या आलोचनात्मक विचार व्यक्त करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की आवश्यकता किन परिस्थितियों में महसूस की गई। अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उन्हें भयभीत करना।
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विभिन्न मामलों में विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और कानूनी कार्रवाई को चुनौती दी जा रही है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।