लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
तेलंगाना। उम्र को मात देते हुए तेलंगाना के 67 वर्षीय करुणाकरण डेविड ने मेडिकल सीट हासिल करने के अपने सपने को पूरा करने के लिए NEET-UG री-टेस्ट परीक्षा दी। शहर के एक परीक्षा केंद्र पर उन्होंने किशोर अभ्यर्थियों के साथ बैठकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया।
करुणाकरण डेविड का यह NEET-UG का दूसरा प्रयास था। NEET-UG परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई अधिकतम उम्र सीमा नहीं होने के कारण उन्होंने इस उम्र में भी डॉक्टर बनने की अपनी कोशिश जारी रखी।
करुणाकरण ने बताया कि यमन से भारत लौटने के बाद वह मेडिकल की पढ़ाई आगे नहीं बढ़ा सके, क्योंकि उनके पास जरूरी डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं था। इसके बाद भी उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा।
उन्होंने केंद्र सरकार के एक विभाग में नौकरी करने के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और मेडिकल क्षेत्र में जाने की इच्छा को जिंदा रखा। करुणाकरण ने बताया कि उनकी मां खुद एक वरिष्ठ डॉक्टर हैं और वह चाहती थीं कि उनका बेटा भी डॉक्टर बने।
67 वर्षीय करुणाकरण का यह प्रयास उम्र की सीमाओं से आगे बढ़कर अपने लक्ष्य को हासिल करने की प्रेरणा दे रहा है। उन्होंने साबित किया कि सीखने और सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती।