लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
शालू कुमारी
उत्तराखंड के हरिद्वार में 54 करोड़ रुपये की जमीन खरीद मामले ने राज्य की नौकरशाही को हिला कर रख दिया है। मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए एक IAS अधिकारी की सेवा समाप्त करने की सिफारिश की है, जबकि दो IAS अधिकारियों, एक PCS अधिकारी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है।
मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा वर्ष 2024 में सराय गांव के पास 2.3 हेक्टेयर भूमि खरीद से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि कूड़ा निस्तारण स्थल के पास स्थित इस भूमि को करीब 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जबकि इसकी वास्तविक बाजार कीमत लगभग 14 से 15 करोड़ रुपये बताई गई। इस सौदे से सरकारी खजाने को करीब 39 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त और 2017 बैच के IAS अधिकारी वरुण चौधरी की सेवा समाप्त करने की सिफारिश केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजी है। साथ ही तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ ‘मेजर पेनल्टी’ की कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम राजवीर सिंह समेत कई अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इससे पहले भी इस मामले में दो IAS, एक PCS अधिकारी सहित कुल 12 अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।
सरकार का कहना है कि भूमि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं, लापरवाही और नियमों की अनदेखी सामने आई है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
यह मामला उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। एक IAS अधिकारी की बर्खास्तगी की सिफारिश और वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल पैदा कर दी है।