लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
घरेलू शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का दबाव अप्रैल में भी जारी है। महीने के शुरुआती दो कारोबारी दिनों में ही, यानी 1 और 2 अप्रैल को विदेशी निवेशकों ने करीब 19,837 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इस दौरान सीमित कारोबार हुआ, क्योंकि 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के कारण बाजार बंद रहा।
इससे पहले मार्च में विदेशी निवेशकों ने 1.17 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिकवाली की थी, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह से विदेशी निवेशक जोखिम कम करने के लिए विभिन्न देशों के शेयर बाजारों से पूंजी निकाल रहे हैं, जिसका असर भारत पर भी दिख रहा है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती भी बाजार पर दबाव बना रही है। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि रुपये में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश कम आकर्षक हो गया है।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक विदेशी निवेशकों की वापसी मुश्किल है। हालांकि लगातार बिकवाली के चलते कई शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक हो गए हैं, जिससे चुनिंदा निवेश अवसर भी बन सकते हैं।
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा उतार-चढ़ाव भरे माहौल में सावधानी से और विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही निवेश करें, ताकि संभावित जोखिम से बचा जा सके।