लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
नई दिल्ली: भारतीय वॉलीबॉल टीम के पूर्व मुख्य कोच जी.ई. श्रीधरन ने कहा है कि यदि भारत को एशियाई स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ानी है तो उसे केवल नेपाल और भूटान जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनका मानना है कि टीम को जापान, ईरान, चीन, दक्षिण कोरिया और चीनी ताइपे जैसी मजबूत एशियाई टीमों के खिलाफ लगातार खेलने का अवसर मिलना चाहिए।
श्रीधरन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव होना बेहद जरूरी है। कमजोर टीमों के खिलाफ लगातार जीत से आत्मविश्वास तो बढ़ सकता है, लेकिन तकनीकी सुधार और बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी के लिए मजबूत विरोधियों से मुकाबला करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय वॉलीबॉल में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों को नियमित अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं की जरूरत है। उनके अनुसार, एशिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलने से खिलाड़ियों की रणनीति, फिटनेस और मानसिक मजबूती में भी सुधार होगा।
पूर्व कोच ने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय टीम को अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट, प्रशिक्षण शिविर और विदेशी दौरों में भाग लेना चाहिए। इससे खिलाड़ियों को विभिन्न खेल शैलियों को समझने और अपने प्रदर्शन को निखारने का अवसर मिलेगा।
भारत ने हाल के वर्षों में क्षेत्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन एशियाई और वैश्विक मंच पर लगातार सफलता हासिल करने के लिए मजबूत टीमों के खिलाफ नियमित मुकाबलों की आवश्यकता है। श्रीधरन का मानना है कि यदि ऐसी रणनीति अपनाई जाती है तो भारतीय वॉलीबॉल आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।