लिसिका ग्रोवर
लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान इसे संसदीय इतिहास का ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य महिलाओं को समय पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है।
मेघवाल ने बताया कि प्रस्तावित संशोधनों के तहत लोकसभा की सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 815 की जाएगी, जिसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आरक्षण अतिरिक्त सीटों पर लागू होगा, जिससे किसी राज्य की मौजूदा सीटों में कमी नहीं आएगी और पुरुष वर्ग को भी कोई नुकसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए लगातार काम कर रही है। वर्ष 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था, जिसे अब लागू करने के लिए ये नए विधेयक लाए गए हैं।
मेघवाल ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 81, 82, 170, 330 और 332 में संशोधन प्रस्तावित हैं। परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा, ताकि नई जनगणना का इंतजार न करना पड़े और महिलाओं को आरक्षण समय पर मिल सके।
उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के संदर्भ में कई सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और सरोजिनी नायडू जैसी महान महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि अवसर मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।
मेघवाल ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इन विधेयकों का समर्थन करें, ताकि भारत के विकास में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि ये कदम 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।