लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
मुंबई: अभिनेता कंवलजीत सिंह ने दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म 'सतलुज' के OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटाए जाने के बाद अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले कलाकारों की रचनात्मक स्वतंत्रता और दर्शकों तक कहानी पहुंचने के अधिकार पर सवाल खड़े करते हैं।
'सतलुज' फिल्म, जो पहले 'पंजाब 95' नाम से जानी जाती थी, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। फिल्म लंबे समय तक सेंसरशिप से जुड़ी अड़चनों में फंसी रही और करीब तीन साल से अधिक समय तक इसकी रिलीज को लेकर विवाद बना रहा।
फिल्म को ZEE5 पर अचानक रिलीज किया गया था, लेकिन रिलीज के कुछ ही दिनों बाद यह भारत में प्लेटफॉर्म से उपलब्ध नहीं रही। ZEE5 ने बयान जारी कर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म को भारत में फिलहाल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और उचित प्रक्रिया के जरिए इसे वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कंवलजीत सिंह ने फिल्म हटाए जाने की घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि कलाकारों को समाज और इतिहास से जुड़े संवेदनशील विषयों पर अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनके बयान के बाद OTT कंटेंट, सेंसरशिप और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म हटाए जाने को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताओं और IT नियमों का हवाला दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं।
फिल्म के कलाकारों और निर्माताओं की ओर से अब आगे की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। 'सतलुज' विवाद ने एक बार फिर भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक घटनाओं, सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।