लोकल न्यूज़ ऑफ़ इंडिया
ऋचा बर्नवाल
आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन बाजार में मिलने वाले हर आम का प्राकृतिक रूप से पका होना जरूरी नहीं है। कई जगहों पर आम को जल्दी पकाने के लिए अवैध रूप से कैल्शियम कार्बाइड (Calcium Carbide) का इस्तेमाल किया जाता है। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह रसायन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और इसके उपयोग पर प्रतिबंध है। इसलिए उपभोक्ताओं को कार्बाइड से पकाए गए आम की पहचान करना और ऐसे फलों से बचना चाहिए।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाली गैस फल को तेजी से पकाती है, लेकिन इसके साथ आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे हानिकारक तत्वों की मिलावट का खतरा भी हो सकता है। ऐसे आम खाने से सिरदर्द, चक्कर, मतली, उल्टी, पेट दर्द, दस्त और मुंह या गले में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
कार्बाइड से पकाए गए आम की पहचान कैसे करें?
- आम का रंग बाहर से पूरी तरह चमकीला पीला दिखे, लेकिन अंदर का गूदा कच्चा या सख्त हो।
- फल पर कहीं-कहीं हरे और कहीं गहरे पीले धब्बे दिखाई दें।
- प्राकृतिक आम जैसी मीठी खुशबू न आए या खुशबू बहुत हल्की हो।
- आम जल्दी नरम हो जाए, लेकिन स्वाद फीका या कम मीठा लगे।
- फल का छिलका असामान्य रूप से चमकदार दिखाई दे।
प्राकृतिक रूप से पके आम की पहचान
- रंग एक समान और स्वाभाविक होता है।
- फल से मीठी और ताजी खुशबू आती है।
- हल्का दबाने पर आम थोड़ा नरम महसूस होता है।
- गूदे का रंग और स्वाद दोनों समान रूप से विकसित होते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आम खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह बहते पानी से धोएं और कुछ समय के लिए पानी में भिगो दें। इससे सतह पर मौजूद रसायनों और धूल को काफी हद तक हटाया जा सकता है। यदि संभव हो तो भरोसेमंद विक्रेता से ही फल खरीदें और अत्यधिक चमकीले या असामान्य दिखने वाले आमों से बचें।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग को असुरक्षित मानता है। फलों को सुरक्षित रूप से पकाने के लिए एथिलीन गैस आधारित स्वीकृत तकनीकों के उपयोग की अनुमति दी जाती है, जबकि कैल्शियम कार्बाइड का प्रयोग प्रतिबंधित है। जागरूकता और सही पहचान के जरिए उपभोक्ता अपने परिवार को सुरक्षित और स्वस्थ फल उपलब्ध करा सकते हैं।